Friday, October 15, 2010

लेखिका की कलम से...

मुझसे कई बार लोगों ने कहा कि मेरी कवितआओं में आंसू ज्यादा हैं तो मैनें भी इसे महसूस किया, मैनें पाया जो कविताओं में जो आंसू मैंने छोडे है उसमें भी जिन्दगी के अक्स छुपे हैं जिन्दगी को मैने कई रूप में महसूस किया है हालांकि मेरी सोच हमेशा सकारात्मक रही है। काफी हद तक मैं जिन्दगी को कविता में पिरोने को लेकर संतुष्ट भी रही हूं । रेखाचित्र के जरिये कलाकार महेश गुप्ता और कलाकार परमात्मा ने कविता को अपनी परिकल्पना ने साकार किया है। आपको यह प्रयास कैसा लगा कृपया अवगत करायें।

हम तो हर दिन जीते रहे
सांसो से धडकन पिरोते रहे
जिन्दगी चलती रही
हम साथ जिन्दगी के चलते रहे।।




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