लखनऊ। कैनवस पर अपनी अभिव्यक्ति उकेरने वाले कालाकार राजीव मिश्र ने रंग और तूलिका से काफी प्रयोग किये। बॉल पेन से कृतियों की श्रंखला अभी बंद ही नहीं हुई थी कि राजीव ने मूर्ती कला में भी नया प्रयोग कर कलाकारों के बीच एक नई बहस छेड दी है। हालांकि राजीव मिश्र के कला प्रेमियों की लम्बी फेहरिस्त है। राजीव को कला के प्रति सर्मपण और योगदान के लिए आने वाले दिनों में ब्राह्मण समाज सम्मानित करेगा।
Tuesday, October 20, 2009
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